पीएम मोदी ने कोसी महासेतु का उद्घाटन कर 17 साल का इंतजार खत्म किया।
नमस्कार,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोसी महासेतु का उद्घाटन किया। कोसी-मिथिलांचल को जोड़ने वाले इस महासेतु का लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। करीब 84 साल के बाद कोसी और मिथिला के लोगों का सपना साकार हुआ। जिसे बनाने में करीब 17 साल लगे और तब जाकर यह सेतु अब चालू होने के लिए तैयार है।
इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि लगभग तीन हजार करोड़ के प्रोजेक्ट से बिहार का रेल नेटवर्क मजबूत होगा। पश्चिम बंगाल, पूर्वी भारत की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

1887 में, निर्मली और भपटियाही (सरायगढ़) के बीच एक मीटर गेज लिंक बनाया गया था। यह लिंक 1934 में विनाशकारी आपदा की वजह से तबाह हो गया था.
इसके बाद कोसी और मिथिलांचल में दूरी बढ़ गई थी. 6 जून 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कोसी मेगा ब्रिज लाइन परियोजना की आधारशिला रखी थी। जिसके बाद से इस सेतु के चालू होने का इंतजार हो रहा था।
पीएम मोदी ने कहा कि बिहार में नदियो के विस्तार के कारण अनेक हिस्से एक दूसरे से कटे रहे हैं। लोगों को लंबा सफर करना पड़ता है। लोग जानते हैं कि किस तरह से सरकारों का काम होता था। लेकिन पिछले पांच-छह साल में इस समस्या के हल के लिए तेजी से कदम बढ़ाए गए हैं।

कोसी नदी पर बना यह रेल महासेतु 1.9 किलोमीटर लंबा है और 516 करोड़ रुपए की लागत से इसे बनाया गया है। पुल के बनने से भारत-नेपाल सीमा के नजदीक संपर्क और आवागमन आसान होगा।
इस पुल के बनने के बाद बिहार में मिथिला और कोसी क्षेत्र रेल संपर्क से जुड़ जाएगा। पुल के बनने से बिहार में निर्मला और सरायगढ़ के बीच की रेल दूरी 296 किलोमीटर से घटकर सिर्फ 22 किलोमीटर रह जाएगी।
पीएम मोदी ने कोसी रेल के अलावा बिहार राज्य के लाभ के लिए यात्री सुविधाओं से संबंधित 12 रेल परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया।
इनमें किऊल नदी पर एक नया रेलवे पुल, दो नई रेलवे लाइनें, 5 विद्युतीकरण परियोजनाएं, एक इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव शेड और बरह-बख्तियारपुर के बीच तीसरी लाइन परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया।
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